उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के छोटे से गांव बुंगाछीना के कर्नल रजनीश जोशी ने अपनी मेहनत और काबिलियत से एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। महज 44 साल की उम्र में, उन्होंने विश्वविख्यात हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान (HMI), दार्जिलिंग के प्राचार्य का पदभार ग्रहण कर लिया है। यह गौरव हासिल करने वाले वे उत्तराखंड के दूसरे सैन्य अधिकारी हैं।
शिक्षा और शुरुआती जीवन
- रजनीश जोशी की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, देवलथल में हुई।
- आगे की पढ़ाई कारमन स्कूल, देहरादून से पूरी की।
- एक सामान्य मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले रजनीश के पिता एक निजी संस्थान में कार्यरत थे और माता गृहणी थीं।
सैन्य जीवन और पर्वतारोहण का सफर
2005 में सेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद, उन्होंने गढ़वाल राइफल्स में अपनी सेवाएं दीं। देश के विभिन्न सैन्य केंद्रों में जिम्मेदारियां निभाने के साथ ही उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
- अब तक हिमालय की 30 से अधिक चोटियों पर चढ़ाई कर चुके हैं।
- उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया, जिनमें से माउंट कुन (7103 मीटर) और माउंट नन (7135 मीटर) की चढ़ाई उल्लेखनीय है।
- माउंट कुन पर मात्र 7 दिनों में चढ़ाई का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज है।
हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान (HMI)
- HMI की स्थापना 4 नवंबर 1954 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
- यह संस्थान पर्वतारोहण और साहसिक खेलों में दुनिया भर के हजारों लोगों को प्रशिक्षित कर चुका है। इसे भारतीय पर्वतारोहण का मक्का भी कहा जाता है।
सम्मान और आगामी योजनाएं
- कर्नल रजनीश जोशी का नाम एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
- साहसिक खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
- अगस्त में वे एनसीसी के बच्चों के साथ एवरेस्ट फतह अभियान का नेतृत्व करेंगे।
गर्व का क्षण
कर्नल रजनीश जोशी की उपलब्धियां न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उनका समर्पण और साहसिक खेलों में योगदान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है।

